बारिश से धुले जंगल के किनारे नीलो नाम का एक नन्हा हाथी बड़े केले के पत्ते के नीचे सोता था। उसे पानी के गड्ढे, आम और धीमी आवाज़ में सुनाई गई कहानियाँ बहुत पसंद थीं। लेकिन गरज उसे बिल्कुल पसंद नहीं थी।
एक शाम आकाश में गरज गूँजी तो नीलो ने अपनी सूंड मोड़ ली। उसने धीरे से कहा, “मैं इतने बड़े आसमान के लिए बहुत छोटा हूँ।” तभी उसकी दोस्त मीना, नीले पंखों वाली चिड़िया, पास आकर बोली, “तुम्हें आसमान से बड़ा नहीं बनना है। बस एक नरम कदम आगे रखना है।”
नीलो ने clearing के किनारे तक एक कदम बढ़ाया। फिर दूसरा कदम बारिश की ओर। गरज आई और चली गई, लेकिन जंगल फिर भी शांत रहा। उसके पैर भी स्थिर रहे।
कुछ ही देर में ठंडी बूंदें उसकी पीठ पर मोतियों जैसी लगीं। नीलो हँस पड़ा और पानी में नाचने लगा। “आसमान तेज़ हो सकता है,” उसने कहा, “और मैं फिर भी शांत रह सकता हूँ।” यही उसकी बहादुरी थी।
बहादुरी हमेशा जोरदार नहीं होती। कभी-कभी वह बस एक छोटा, नरम कदम होती है।